short moral stories in hindi for kids

Wow Best Short Moral Stories in Hindi For Kids

Best Short Moral Stories in Hindi For Kids (Top 10 Moral Stories in Hindi)

Best Short Moral Stories in Hindi For Kids: दोस्तों आज के जमाने में ये बहोत जरुरी है की हम अपने बच्चों को सही शिक्षा दें क्यूंकि शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है जो ज़िन्दगी की हर लड़ाई इंसान को जीतना सिखाता है. बचपन में दी गयी शिक्षा बड़े होने पर जरूर काम आती है. तो दोस्तों आज ऐसी ही शिक्षाप्रद और मजेदार कहानियां हम आपके लिए लेकर आये हैं तो चलिए शुरू करते हैं Best Short Moral Stories in Hindi For Kids.

Best Moral Stories For Kids

  1. सत्यमेव जयते: Moral Story for Children in Hindi (For Class 2)
  2. मोनू: Moral Story for Children in Hindi (For Class 3)
  3. अनमोल वृक्ष: New Moral Story in Hindi (Very Short Stories in Hindi)
  4. मीठे बोल: Short Moral Story in Hindi For Class 1
  5. वह बंद लिफाफा: Best Moral Story Ever in Hindi (For Class 9)
  6. एक सच: Hindi Short Story for Class 1 with Moral
  7. शिक्षा ही जीवन है: Moral Story in Hindi For Education

सत्यमेव जयते: Moral Story for Children in Hindi ( Short Moral Stories in Hindi For Kids For Class 2)

जब भी रिया की माँ उससे पढ़ने को कहती, वह फ़ौरन कोई न कोई बहाना बना कर कहती “माँ, आज मैं बहोत थक गयी हूँ तो कभी कहती, मेरे सर में बहोत दर्द है. “

एक दिन उसकी माँ को गुस्सा आ गया. वह रिया से बोली “ठीक है, आज से तुम्हारी कोई फरमाइश पूरी नहीं की जाएगी. और न ही तुम खेलने जाओगी”

अपनी माँ की बात सुनकर रिया डर गयी वह माफ़ी मांगते हुए बोली “माँ, अब मैं कोई बहाना नहीं करुँगी, दिल लगाकर पढूंगी.” रिया की माँ पहले तो अपनी बात पर अड़ी रही, लेकिन बार बार गिड़गिड़ाने पर उसने अपनी बेटी को माफ़ कर दिया.

एक रात रिया ने सपना देखा एक परी उससे कह रही थी–” रिया याद रखना, कभी भी झूठ मत बोलना, क्योंकि मन की बात ईश्वर खूब जानता है. अगर तुमने अपनी माँ से सच कहा है, तो तुम्हें अच्छा फल मिलेगा. लेकिन अगर उन्हें धोखा दिया है और झूठ बोला है की तुम दिल लगाकर पढ़ोगी तो देखना उसका अंजाम तुम अपनी क्लास में एक फेल विद्यार्थी के रूप में खड़ी होगी. सब तुम्हारी हंसी उड़ाएंगे”

परी की बात सुनकर रिया चौंककर उठ बैठी!

वह दौड़कर अपनी माँ के पास जाकर उसके गले लिपट कर बोली, “माँ क्या ये सच है की झूठ का नतीजा बुरा होता है?

उसकी माँ ने कहा, “हाँ बेटी एक झूठ सौ झूठ को जन्म देता है. बेटी! लकड़ी की हांड़ी चूल्हे की आग पर रखोगे तो दोहरा नुक्सान होगा ऐसा करने से हांडी भी जल जाएगी और उसमें रखा सामान भी बर्बाद हो जायेगा.”

रिया बोली, “माँ यही सच है, कल मैंने आपसे झूठ कहा था की मैं दिल लगाकर पढूंगी पर आज मैं सच कहती हूँ की दिल लगाकर पढूंगी और कक्षा में प्रथम आउंगी.” इसके बाद रिया अपनी कक्षा में प्रथम आयी.

Moral of The Story

झूठ बोलना पहली बार आसान हो सकता है लेकिन बाद में तकलीफ ही देता है और सच बोलना पहली बार मैं मुश्किल हो सकता है लेकिन बाद में इसका परिणाम अच्छा ही होता है

ज़िन्दगी में हमें दूसरों से तो क्या खुदसे भी झूठ नहीं बोलना चाइये क्यूंकि झूठ का परिणाम हमेशा खराब ही होता है

यह भी जरूर पढ़ें: एहसान : 1 Short Story with 10 Morals in Hindi

मोनू: Moral Story for Children in Hindi ( Short Moral Stories in Hindi For Kids For Class 3)

मोनू चूहा बड़ा शरारती था. वह कभी भी अपनी माँ का कहना नहीं मानता था. एक दिन उसकी माँ दवाई लेने गयी और जाते वक़्त मोनू से कह गयी, “कहीं बाहर मत जाना मगर वह नहीं माना, अपनी माँ के जाते ही झट से घूमने निकल पड़ा. उछलते कूदते नदी किनारे पंहुचा. वहां पहुंचकर तो उसे और भी अच्छा लगा. खेल कूद कर जब वह थक गया तो उसे नींद आने लगी वह वहीँ नीम के पेड़ के नीचे सो गया.

एकाएक उसकी आँख खुली. सूरज डूब चूका था. चारों तरफ अँधेरा देखकर, वह डर के मारे रोने लगा. उसको रोता देखकर पेड़ पर बैठा उल्लू, जिसे उसके साथी “गाइड” इस नाम से पुकारते थे, बोला “यह बताओ की तुम इस नदी के किनारे कैसे पहुंचे?” मोनू बोला, “मेरी माँ मुझे कहीं नहीं जाने देती. आज जब माँ घर पर नहीं थी, तब मैं चुपके से घूमने निकल आया. घुमते घुमते यह नदी नजर आयी बस यहीं रुक कर खेलने लगा.”

मोनू की बात सुनकर उल्लू बोला, “यही होता है बड़ों का कहना न मानने का अंजाम. तुम नहीं जानते की माँ बाप अगर अपने बच्चों को रोकते टोकते हैं, तो उसमें उनकी ही भलाई होती है. अच्छा चलो, अब रोना बंद करो, मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ आता हूँ

गाइड से मोनू बुरी तरह डरा हुआ था. उसे डर था की कोई उसे अपना शिकार न बना ले. मोनू ने अपनी माँ से सुना था की कुछ लोग बच्चों को बहलाकर ले जाते हैं. और उनसे भीख मांगने आदि जैसे घिनौने काम करवाते हैं. इसलिए वह कुछ बोल नहीं पा रहा था. उसकी आँखों में आंसू साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे. गाइड समझ गया की मोनू क्या सोच रहा है. उसने कहा, “घबराओ नहीं मैं तुम्हें घर पंहुचा कर आऊंगा.” मोनू के पास और कोई चारा भी तो नहीं था गाइड के साथ मोनू चल पड़ा.

अभी वह आधे रास्ते ही पंहुचा था की मोनू की माँ आती दिखाई दी मोनू अपनी माँ को देखते हे ख़ुशी से उछाल पड़ा और बोला माँ आज के बाद से मैं हमेशा आपका कहना मानूंगा मोनू की माँ ने गाइड को धन्यवाद दिया मोनू की माँ अंदर ही अंदर खुश थी क्यूंकि एक तो उसका खोया हुआ बीटा मिल गया था और दूसरी जो बात वह मोनू को समझा नहीं पा रही थी वह उसे अब स्वयं समझ आ गयी थी की बड़ों की बात न मानने से बच्चे कभी कभी बहुत बड़ी परेशानी में फंस जाते हैं

Moral of The Story

“बड़े जो कहते हैं सही कहते हैं इस बात की समझ बात न मानकर ही आती है “

दोस्तों आज का समय बहोत मॉडर्न हो गया है और बच्चे भी एडवांस हो गए हैं लेकिन कई बार बच्चे नादानी में ऐसे काम कर जाते हैं, जिससे उनको भी नुक्सान होता है और साथ ही घर वालों को भी .

बच्चों के लिए यह जरुरी है की आज के समय में जहाँ जमाना इतना तेजी से बदल रहा है अपनी माता पिता की बातों को ध्याम में रखते हुए आगे बड़े क्यूंकि बड़े जो बोलते हैं सही बोलते हैं

यह भी जरूर पढ़ें: हार को जीत में कैसे बदलें? Hindi Motivational Story

अनमोल वृक्ष: New Moral Story in Hindi ( Short Moral Stories in Hindi For Kids, Very Short Stories in Hindi)

उस दिन पूरा जंगल भारी भरकम मचिनो और ट्रकों के शोर से भर गया था. यह सिलसिला तीन-चार दिनों तक चला. जंगल के पशु-पक्षियों और वृक्ष-लताओं को यह समझ नहीं आ रहा था की सृष्टि का सबसे समझदार प्राणी– मनुष्य क्या करने जा रहा है. लेकिन जब मशीन खुलीं और उन्हें मैदानों में लगाया गया तो सबके प्राण गले में आ गए. पीपल बोला, “हैरान होता हूँ मैं मनुष्यों का व्यवहार देखकर, क्योंकि एक तरफ तो ये हमारी पूजा करते हैं और दूसरी और हमें बुरी तरह काटते हैं

सभी ने अपने अपने तर्क रखे. सभी की बात सही थी. लेकिन साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था, की अब किसी की खैर नहीं है. आखिर सब मिलकर उस कैंप में गए, जहाँ जंगल को काटने का प्लान बनाया जा रहा था. चपरासी के हाथ खबर भेजी गयी. और सुग्गा तोता, लोमड़ी ताई और बघेरा को अंदर भेजा गया अफसर से मिलने. पीपल और वट भी साथ थे. पांचो ने अफसर के सामने अपनी बात रखी. “आप लोग जंगलों को बचाने के नाम पर अंधाधुन्द खर्च करते हो, प्रकृति को बचाने के सम्मलेन करते हो, जानते हो की हमारा जीवन एक दुसरे से जुड़ा हुआ है, फिर यह क्या है जो आप करने जा रहे हो?”

देखो जो तुम लोग कह रहे हो, इससे हमारा कोई लेना- देना नहीं है. हम तो पैसा कमाने आये हैं. शहर में बड़ी बड़ी इमारतें बन रही हैं, उनके लिए हमें लकड़ी चाहिए. पेड़ तो बाद मैं भी उग आएंगे. एक बात और, तुम सबको इसलिए भगवान् ने बनाया है, ताकि उसकी सबसे प्यारी संतान अर्थात हम मनुष्य मौज- मस्ती कर सकें, जीवन का आनंद उठा सकें.

अफसर ने किसी एक की न सुनी सब मुंह लटकाकर वापस आ गए.

कुछ दिन बीते भाड़ और तूफ़ान ने बड़ी बड़ी इमारतों को जमीन में मिला दिया शहर बर्बाद हो गया.

फिर कुछ लोग आये जंगल में. उनके पास तरह तरह के पौधे थे, जिन्हे वे गढ्डे खोद कर उनमें लगा रहे थे.

“पीपल ने पूछा क्या कर रहे हो?

कुछ नहीं हमारे साथियों ने जानभूझकर जो गलती की उसका प्रायश्चित कर रहे हैं. इस बार जंगलों को शहर नहीं, पूरी तरह से जंगल बनाना है.” एक मनुष्य ने जवाब दिया”

Moral of The Story

प्रकृति के अलग अलग रूपों की पूजा करने से काम नहीं चलेगा उसकी सुरक्षा भी करनी होगी स्वीकारना होगा की हम भी प्रकृति का अटूट हिस्सा हैं

आज के समय में इंसान अपने ऐश और आराम में इतना ज्यादा खो गया है की प्रकृति को अनदेखा कर रहा है लेकिन जब प्रकृति अपने पर आएगी तो हम कही के भी नहीं रहेंगे हमे इस बात को समझना चाइये और प्रकृति को बचाना चाहिए क्यूंकि प्रकृति है तो हम हैं

मीठे बोल: Short Moral Story in Hindi For Class 1

दो चींटियां थी टीनू और नीनू. नीनू बहुत ही नम्र स्वभाव और मीठे बोल बोलने वाली थी. जबकि टीनू बड़ी घमंडी थी. वह हमेशा अपनी अकड़ में रहती थी. जब जो जी में आता, उल्टा सीधा बोल देती थी. उसे छोटे बड़ों से कैसे व्यवहार करना है इसका कुछ भी पता नहीं था.

जिस घर में ये दोनों चीटियां रहती थी, वहां रंग रोगन का काम शुरू हुआ. शाम हुई तो पूरा घर धोया जाने लगा. पूरे फर्श पर पानी ही पानी देख कर नीनू ने टीनू से पूछा, “अब हमारा क्या होगा?” टीनू गुस्से में बोली, होगा क्या, किसी कोने में छिपे रहेंगे जब फर्श सूख जायेगा, फिर हमारा राज होगा वैसे भी ये लोग हमारा क्या क्या बिगाड़ लेंगे.”

टीनू की बात सुनकर नीनू ने उससे कहा, “मेरी समझ में नहीं आता, तुम हरेक को बिना सोचे- समझे बुरा भला कहने लगती हो. इस घर के लोगों से हमारी दुश्मनी थोड़ी है. तुम यह क्यों नहीं सोचती, हम हैं ही नन्ही सी जान, कब कहाँ कुचली जाएँ क्या मालूम

अच्छा चुप रहो, जब देखो नसीहत देती रहती हो, “यह कहकर टीनू जाने लगी, तभी अचानक एक मजदूर का पैर नीनू पर पड़ गया, जैसे- तैसे नीनू खुदको बचाते हुए बोली, “प्यारे इंसान, ईश्वर तुम्हारा भला करेगा, मुझ नन्ही सी जान पर रहम करो.” नीनू के मीठे बोल सुनकर मजदूर हैरान हो गया. उसने नीनू को फर्श से उठाकर दीवार के सहारे छोड़ दिया. नीनू ने उसका धन्यवाद दिया और दीवार पर धीरे धीरे चढ़ने लगी.

शाम हुई. उस घर का सारा सामान अपनी-अपनी जगह रख दिया गया. फर्श पर पानी डाला गया. टीनू उस पानी में बह गयी. वह चिल्लाई, “बचाओ- बचाओ” मजदूर ने आवाज सुनी. उसने सोचा शायद यह वही चींटी है, जिसे उसने दीवार पर चढ़ाया था. उसने झट्ट से उसे पानी में से निकाल दिया. पानी से बाहर आते ही टीनू गुस्से में न जाने क्या क्या बोल गयी. उसने मजदूर का ही नहीं मजदूरी का भी अपमान कर दिया. मजदूर को टीनू का ताना सुनकर दुःख हुआ, वह समझ गया की यह कोई दूसरी ही चींटी है, वह नहीं जिसे उसने दीवार के किनारे छोड़ा था. बस उसने उसी वक़्त टीनू को उठाकर बहते पानी में फेंक दिया. टीनू का अहंकार भरा कड़वापन उसे एक झटके में न जाने कहाँ से कहाँ बहाकर ले गया. नीनू से उसे बहुत डूंडा पर वह नहीं मिली.

Moral of The Story

घमंड करके और कड़वा बोलकर कोई नहीं जीत पता जिंदगी में रावण ने घमंड किया था उसका भी सर्वनाश हुआ. जब हम मीठा बोलते हैं लोग अपने आप ही हमसे प्यार करने लग जाते हैं और हमारे दोस्त बन जाते हैं हमारी मदद भी करते हैं इसके विपरीत अगर हम हमेशा कड़वा ही बोलते हैं तो समाज में हमारी इज़्ज़त नहीं रहती और हम अकेले हो जाते हैं कोई हमारा साथ नहीं देता. इसलिए कभी घमंड नहीं करना चाहिए. और सबके साथ मीठा बोलना चाहिए

वह बंद लिफाफा: Best Moral Story Ever in Hindi ( Short Moral Stories in Hindi For Kids For Class 9)

आज जंगल में हलचल मची थी, जिसे देखो, सब तनु- मनु नेवलों को बुरा-भला कह रहे थे. मामला जंगल के राजा के पास पहुँच गया था. उन दोनों को शेर के सामने हाजिर किया गया. शेर ने गुर्राते हुए पूछा, “यह मैं क्या सुन रहा हूँ? तुम दोनों हम सबके खिलाफ कोई साजिश रच रहे हो? यह है तुम्हारे गुनाह का सबूत. यह तो अच्छा हुआ की चंकू गैंडे ने मुझ तक यह लिफाफा पहुंचा दिया,वर्ना तो तुम दोनों न जाने क्या गुल खिलाते.”

तनु- मनु अपनी सफाई में कुछ कहना चाहते थे. लेकिन जंगल के महाराजा ने कुछ भी सुनने से साफ इंकार कर दिया. महाराज ने उन्हें सजा दी और कहा, “तीन दिन तक इन्हे भूखा रखा जाये” फिर उन्हें एक अँधेरी गुफा में बंद करवा दिया.”

देखूं तो सही तनु- मनु की क्या साजिश है इसमें. यह सोचते हुए जैसे ही महाराज ने संभाल कर लिफाफा खोला, उसमें लिखे शब्दों को पढ़कर वे दंग रह गए उन दोनों ने सरकार को एक पत्र लिखा था. पत्र में लिखा था-

ओह इंसानों तुम्हे क्या हो गया है? अपने स्वाद और महलों को सजाने- संवारने के लिए तुमने पशु- पक्षियों को अंधाधुन्द मारा है. बता सकते हो की उन्होंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? अपने अधिकारों के लिए तुम लोग दुनिया भर की नारेबाजी करते हो, लेकिन उन अधिकारों के बारे में भी क्या कभी तुम लोगों ने सोचा, जिन्हे तुम अपने मनोरंजन के नाम पर दूसरों से छीनते हो. मौत का खेल खेलने वालों तुम कैसे खुद को इंसान कहते हो.

इन शब्दों को पढ़कर महाराज को तनु- मनु की मंशा समझ आ गयी. वे तो पशु- पक्षियों के जीवन की रक्षा की दुहाई दे रहे थे. आगे के शब्दों को पढ़कर तो महाराज को अपनी गलती का पूरी तरह से एहसास हो गया. तनु मनु ने आगे लिखा था–

और अब तुम हमारे महाराज को- जंगल के राजा शेर को अपना निशाना बना रहे हो? कैसे हो तुम? एक तरफ तो उन्हें राष्ट्रीय पशु कहते हो तो दुरसी तरह उन्हें ख़त्म करने पर तुले हो.

उफ़! यह क्या किया मैंने महाराज के मुंह से सहसा निकला. उनकी आँखों से पश्चाताप के आंसू बहने लगे. सोचने लगे मैंने सुनी सुनाई बातों पर विश्वास करके कितनी बड़ी भूल की. बाद में उन्होंने तनु- मनु से अपने किये पर खेद प्रकट किया. और उन्हें अपना दरबारी बना लिया सजा दी चंकू गैंडे को.

Moral of The Story

कानों का काम सुन्ना है देखना नहीं. इसलिए कानो पर नहीं आँखों पर विश्वास करना चाहिए और आँख है आपकी बुद्धि .

और जो अपनी बुद्धि से काम नहीं लेता और सुनी सुनाई बातों पर विश्वास कर लेता है. दूसरे लोग इसी बात का फायदा उठा लेते है. इसलिए अपनी बुद्धि को हमेशा उपयोग में लाओ

यह भी जरूर पढ़ें: Short Moral Stories in Hindi For Class 10

Short Moral Stories in Hindi FOR kIDS
Short Moral Stories in Hindi FOR kIDS

एक सच: Hindi Short Story for Class 1 with Moral ( Short Moral Stories in Hindi For Kids )

किसी गाँव में अजय नाम का एक लड़का रहता था. वह बहुत गरीब था. गाँव के पास मेला लगा. उसने अपनी माँ से कहा, मैं भी मेला देखने जाऊंगा .”

उसकी माँ बोली, “हमें दो वक़्त की रोटी ऊपर वाला दे देता है, यही गनीमत समझो. मेला देखने की जिद्द छोड़ दो.” अपनी माँ की बात सुनकर अजय उदास हो गया और एक पेड़ के नीचे जा बैठा.

अचानक उसकी नजर दूर पेड़ों के पीछे गयी, जहाँ बहुत तेज रौशनी थी. वह उठकर वहां गया. वहां सुनहरे पंखों वाली एक परी खड़ी थी. अजय ने हैरान होकर उस परी से पूछा, “तुम कौन हो? तो वह बोली मैं परी हूँ. लेकिन तुम यहां उदास क्यों बैठे हो?

परी की बात सुनकर अजय की आँखों में आंसू आ गए. वह बोला, “मैं बहोत गरीब हूँ, मेरे पास इतने पैसे नहीं की मैं अपने दोस्तों के साथ मेला देखने जा सकूँ.” यह कहकर अजय खामोश हो गया.

तब परी बोली, “इसमें दुःख की क्या बात है, यूँ समझ लो, ईश्वर ने तुम्हारी मदद करने के लिए ही मुझे भेजा है. लेकिन ऐसा मैं तभी करुँगी, जब तुम मेरी परीक्षा में पास हो जाओगे?”

. क्या परीक्षा है? अजय ने पूछा. परी ने कहा, “बता दिया तो परीक्षा कैसी?”

“ठीक है.” ऐसा कहकर अजय वहां से चल दिया. अभी वह कुछ दूर ही गया था की उसे रास्ते में गिरी हुई एक पोटली मिली. लाल रंग की इस मखमली पोटली में कोई कीमती चीज होगी, अजय को यह विश्वास हो गया. उसने उसे खोलना चाहा, लेकिन सोचने लगा, जब यह मेरी नहीं है, तो इसे खोलने का मेरा हक़ ही नहीं बनता. अजय ने पोटली नहीं खोली. किसी की आवाज उसके कानों में पड़ी, “भैया, मेरी पोटली गिर गयी है कहीं रास्ते में, तुमने उसे देखा है?”

अजय ने पूछा, “किस रंग की थी?

“लाल रंग की?” राहगीर ने बताया.

“और कोई पहचान बताओ?” अजय ने राहगीर से पूछा” उस पर एक परी का चित्र बना है सुनहरे रंग में. राहगीर का जवाब था अजय ने अपनी कमीज के निचे से जब वह पोटली निकाली, तो उस पर छपी परी का चित्र चमकने लगा. अजय ने वह पोटली राहगीर को दे दी.

वह अपने घर पहुंचा. सोचता रहा की उसने ठीक किया या गलत. उलझन में वह सो गया. सुबह उठकर वह वहीँ पंहुचा जहां उसे परी मिली थी. लेकिन वहां तो कोई नहीं था. वह बैठ गया. उसकी आँखों के सामने वही लाल रंग की पोटली दिखाई देने लगी. तभी तेज प्रकाश हुआ. देखा तो सामने परी खड़ी थी. परी के दोनों हाथ पीछे थे. परी ने पूछा “कैसे हो?” “ठीक हूँ”. अजय ने जवाब दिया. तभी परी ने कहा, “अपनी आँखें बंद करो. मैं तुम्हें इनाम दूंगी.”

किस बात का? अजय ने पूछा.

“तुम परीक्षा में पास हो गए, इसलिये. “परी बोली.

परी की बात अजय को समझ नहीं आ रही थी. उसने आँखें बंद कर ली. परी ने उसके हाथों में एक मखमली थैली पकड़ा दी. अजय ने देखा, तो हैरान हो गया, क्योंकि यह तो वही थैली थी, जिसे उसने राहगीर को दिया था. परी ने कहा, “कल मैंने ही तुम्हारी ईमानदारी की परीक्षा ली थी. वह राहगीर भी मैं ही थी. इसलिए मैं तुम्हें यह इनाम दे रही हूँ.”

परी ने अजय को समझाया, “ईमानदार के जीवन में किसी वस्तु की कमी नहीं हुआ करती. जीवन की परीक्षा में वह जो कुछ भी खोता है, वह उसे कई गुना होकर प्राप्त होता है. जाओ! अब तुम्हें किसी वस्तु की कमी नहीं रहेगी.

अजय के पास अब वह शब्द नहीं थे जिनसे वह परी का धन्यवाद करता. ख़ुशी में उसकी आँखें डबडबा आयी थी.

लाल रेशमी थैली जब अजय ने अपनी माँ को पकड़ाई, तो उसे यह समझ नहीं आया की उसका बेटा उससे मजाक क्यों कर रहा है. लेकिन उसने जब वह पोटली खोली, तो उसकी आँखें चौंधिया गयी. पोटली अशर्फियों और बेशकीमती रत्नों से भरी हुई थी. माँ के पूछने पर अजय ने सबकुछ बता दिया. परी ने खुद आकर अजय की माँ को समझाया. इसके बाद अजय के परिवार के सारे अभाव समाप्त हो गए. अजय को पूरा शहर दयालु सेठ के रूप में जानने लगा.

Moral of The Story

“किसी की वस्तु को अपना समझने की भूल करने से हमेशा हानि होती है दूसरों को उनकी वास्तु लौटना सबसे बड़ी कमाई है “

यह भी जरूर पढ़ें: Inspirational Stories with Moral in Hindi

Short Moral Stories in Hindi FOR kIDS
Short Moral Stories in Hindi FOR kIDS

शिक्षा ही जीवन है: Moral Story in Hindi For Education ( Short Moral Stories in Hindi For Kids )

शाहिद नाम का एक लड़का था. वह पढ़ने से हमेशा जी चुराता था. जब देखो कोई न कोई बहाना करके स्कूल की छुट्टी कर लेता. आज भी उसने यही किया. उसकी माँ ने कहा, ” शाहिद तुम्हारी परीक्षा सर पर है और तुमने फिर आज छुट्टी कर ली.” शाहिद बोला, “अम्मा आज मेरे सर में बहोत दर्द है, यह बहाना बनाकर वह लेट गया. कुछ देर बाद उसकी माँ पड़ोस में चली गयी. शाहिद ने जैसे ही माँ को जाते देखा तुरंत खेलने निकल गया.

शाम ढले जब वह घर लौटा तो उसकी माँ बोली, “अब तो पढ़ने बैठ जाओ.” माँ की बात सुनते ही शाहिद ने फिर एक नया बहाना ढूंढ लिया और जाकर फिर से लेट गया तभी उसके कानों में एक मधु मक्खी की बिन बिनाहट सुनाई दी, उसने चादर मुंह से हटाई तो मक्खी बोली, “दोस्त तुम चार किताबें पढ़कर थक जाते हो, खेलने कूदने में नहीं थकते क्या? मुझे देखो मैं रात दिन फूलों से शहद इकठ्ठा करती हूँ, फिर भी नहीं कहती की मैं थक गयी हूँ. मैं जानती हूँ की ईश्वर ने मुझे इसी काम के लिए पैदा किया है.” शाहिद ने पूछा लेकिन हमें क्यों भेजा है, ” मधु मक्खी बोली इंसांनो को अपना जीवन संवारने के लिए भेजा है और यह काम शिक्षा से ही हो सकता है, यह हमेशा याद रखना की शिक्षा ही जीवन है. जो शिक्षा से दूर भागता है ख़ुशी उसके पास नहीं आती है.

दोस्तों मैं उम्मीद करता हूँ आपको कहानियां पसंद आयी होंगी. अपने सुझाव हमें कमेंट के रूप में जरूर भेजें और अगर आप भी कहानियां लिखते हैं तो हमें नीचे दी गयी ईमेल आईडी पर भेज सकते हैं दोस्तों ये छोटी छोटी कहानियां ही हमें ज़िन्दगी की बड़ी सीख देती हैं अगर हम इन कहानियों की सीख को अपने जीवन में उतारें तो हम बहोत कुछ बड़ा कर सकते हैं दोस्तों अगर आपको कहानियां पसंद आयी तो इन्हे जरूर शेयर करें ताकि हम लोग दूसरों के भी काम आ सकें



One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*
*
*